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जंतर मंतर पर सुन्नी समुदाय का भारी प्रदर्शन

तीन तलाक़ और समान संहिता का पुरजोर विरोध

सुन्नी सूफ़ी संगठनों का सामूहिक विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। भारत के प्रतिष्ठित सुन्नी सूफ़ी संगठनों ने आज दिल्ली के जंतर मंतर पर समान नागरिक संहिता के विरुद्ध ज़ोरदार प्रदर्शन किया और क़ानून आयोग को अपनी सिफ़ारिशों से पहले ली जाने वाली राय को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर देश को धकेलने की नीयत कहा।

जंतर मंतर पर जुटे हज़ारों सुन्नी सूफ़ी मुसलमानों ने हालिया लॉ कमीशन की उस राय का विरोध किया जिसमें पूछा गया है कि क्या तीन बार में एक तलाक़ को समाप्त कर दिया जाए। भारत के सुन्नी उलेमा की सबसे बड़ी तंज़ीम ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम, भारत की प्रतिष्ठित रज़ा एकेडमी और भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया समेत आधा दर्जन सुन्नी संगठनों के संयुक्त प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों और वक्ताओं ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाज़ी की। प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि लॉ कमीशन ने ये सवाल पूछ कर मुसलमानों के निजी क़ानून में दख़ल देने की कोशिश की है। ऐन उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले इस पहल पर वक्ताओं का मानना है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर पूरे देश का साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कर उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुँचाने की कोशिश कर रही है, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

शरीअत में बदलाव मंज़ूर नहीं- मुफ़्ती अशफ़ाक़

भारत के सबसे बड़े मुस्लिम उलेमा संगठन ऑल इंडिया तज़ीम उलामा-ए-इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार शरीअत में यदि किसी भी प्रकार की दख़ल देगी तो उसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि मोदी सरकार की इस पहल का उत्तर प्रदेश के चुनाव में राज्य की 25 फ़ीसदी मुसलमान और 30 फ़ीसदी दलित भारतीय जनता पार्टी को बेहतर जवाब देंगे। मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि जब हर सम्प्रदाय और मज़हब के लोगों को अपनी निजी संहिताओं, पुस्तकों, आस्था, विश्वास और परम्परा के अनुसार नागरिक क़ानून मानने की छूट है तो वह सिर्फ़ मुसलमानों के तलाक़ के मसले पर ही पीछे क्यों पड़ी है? मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता मोहन भागवत को आड़े हाथों लेते हुए कहाकि इन लोगों को सिर्फ़ देश को साम्प्रदायिक स्तर पर बाँटकर वोट लेने की बीमारी है, जिसका इलाज 2017 के उत्त्तर प्रदेश की जनता कर देगी। लोग अब बँटवारा नहीं चाहते और किसी भी मज़हब के निजी क़ानूनों में दख़ल को भी लोग पसंद नहीं करते। मुफ़्ती अशफ़ाक ने कहाकि तीन तलाक़ या समान नागरिक संहिता के बहाने देश के मुसलमान साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होने देंगे।

आरएसएस के एजेंडे पर नहीं चलेगा देश- सईद नूरी

मुंबई की रज़ा एकेडमी के संस्थापक सईद नूरी ने कहाकि भारत के सूफ़ी मुसलमान हनफ़ी व्याख्या के अनुसार अपने निजी क़ानूनों को मानने के लिए राज़ी हैं। जिन महिलाओं या कई मामलों में पुरुषों को भी तलाक़ से जुड़े मसलों पर आवश्यक हो तो अदालत की शरण लेनी पड़ती है और न्यायालय के फ़ैसले का सभी सम्मान करते हैं लेकिन जब से केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार आई है वह लगातार मुसलमानों के जज़्बात से खेल रही है। सईद नूरी ने कहाकि मोदी और भारतीय जनता पार्टी की देश को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एजेंडे पर धकेलने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा और भारत में हर विश्वास और धर्म के लोगों के निजी क़ानूनों की पालना की छूट को बचाने के लिए भारत का मुसलमान कोशिश करता रहेगा। नूरी ने कहाकि भारतीय संविधान के आर्टिकल 44 को भी भाजपाई और आरएसएस के लोग और समर्थक ग़लत रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं क्योंकि इसमें विश्वास के आधार पर निजी क़ानूनों के प्रैक्टिस की छूट दी गई है।

बरेली दरगाह के संदेश को समझें- मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली की आला हज़रत दरगाह के जनसम्पर्क अधिकारी और ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन ने कहाकि दो दिन पहले बरेली दरगाह में ज़िम्मेदार लोगों की बैठक में यह तय हुआ है कि भारत के लॉ कमीशन, क़ानून मंत्रालय या मोदी सरकार को मुसललानों के निजी क़ानून में दख़ल का कोई अधिकार नहीं है। मौलाना शहाबुददीन ने कहाकि इस बहस के बहाने से भारतीय जनता पार्टी सोचती है कि वह प्रदेश का साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करके चुनाव जीत जाएगी तो वह ग़लतफ़हमी में है क्योंकि उत्तर प्रदेश की 55 फ़ीसदी मुसलमान और दलित आबादी बीजेपी के मंसूबे जानती है और अगले साल के चुनाव में इसका भरपूर जवाब दिया जाएगा। मौलाना शहाबुद्दीन ने अन्य अल्पसंख्यक यानी जैन, सिख, पारसी और आदिवासियों से आह्वान किया कि वह बीजेपी की इस योजना को विफल करने में उनका साथ दें क्योंकि यदि आज वह ख़ामोश रहे तो अगला नम्बर उनका है।

लॉ कमीशन को समय पर अपनी राय दें- शुजात क़ादरी

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव शुजात क़ादरी ने कहाकि लॉ कमीशन ने जो सवाल पूछे हैं उसका समय पर पूरा जवाब दिया जाए क्योंकि बायकॉट करने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। शुजात ने कहाकि सुप्रीम कोर्ट के सायरा बानो के केस का हवाला देकर जो सवाल पूछे गए हैं उसमें तीन तलाक़ का मुद्दा था ही नहीं। ऐसे में रविशंकर प्रसाद एंड कम्पनी की इस नीयत पर सवाल उठाया जाना लाज़मी है कि जो बहस उन्होंने देश के सामने लाकर रख दी है क्या वह उसका राजनीतिक फ़ायदा भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव में देना चाहते हैं। यदि वह ऐसा सोचते हैं तो उन्हें याद रखना चाहिए कि इसका जवाब उन्हें मिलेगा। शुजात ने सभी वर्ग के युवाओं से अपील की कि वह राजनीति को समझें कि यदि वह ट्रिपल तलाक़ के बहाने इस्लामी शरीअत के इस निर्णय को आज मान लेंगे तो यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समान नागरिक संहिता के सपने की शुरूआत है जिसमें मुसलमानों के बाद आदिवासियों, दलित, जैन, सिख और पारसियों का भी नम्बर आएगा।

समान नागरिक संहिता के ख़िलाफ़ हैं मुसलमान- सैयद जावेद नक्शबंदी

प्रख्यात सूफ़ी विचारक सैयद जावेद नक़्शबंदी ने इस अवसर पर कहाकि भारत में जब ब्रिटिश क़ानून था और आज़ादी के 70 साल तक समान नागरिक संहिता को थोपने की बात नहीं हुई तो भारतीय जनता पार्टी के राज में ही यह बहस क्यों हो रही है? नक़्शबंदी ने कहाकि मुसमलानों के अलावा आदिवासी, दलित, जैन, सिख और पारसी भी इस बात को समझें कि यह देश को ब्राह्मणवाद पर धकेलने की संघी साज़िश है जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। नक़्शबंदी ने कहाकि भारत का पाँच हज़ार साल तक शोषण करने वाली पुरोहितवादी विचारधारा को लंबे अंतराल के बाद जैसे ही मौक़ा मिला वह फिर सामाजिक शोषण की अवधारणा को लागू करना चाहती है लेकिन मुसलमान, आदिवासी और दलित ही नहीं बल्कि अन्य अल्पसंख्यक यानी जैन, सिख और पारसी भी देश को आरएसएस के एजेंडे पर नहीं चलने देंगे। नक़्शबंदी ने कहाकि उत्तर प्रदेश के चुनाव में समान नागरिक संहिता को लोकतांत्रिक तरीक़े से बेहतर जवाब दिया जाएगा।

शरीअत में बदलाव की गुंजाइश नहीं- कारी सग़ीर

दिल्ली की शास्त्री पार्क की क़ादरी मस्जिद के प्रतिनिधि कारी सग़ीर ने कहाकि भारतीय जनता पार्टी जब से सत्ता में आई है तब से वह देश को साम्प्रदायिक आधार पर बाँटना चाहती है जबकि उसकी इस कोशिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। कारी सग़ीर ने कहाकि आरएसएस देश में एक क़ानून के बहाने देश के मुसलमानों का ही नहीं बल्कि दलितों, आदिवासियों, जैन, सिखों और पारसियों का शोषण कर पुरोहितवाद को स्थापित करना चाहती है जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। कारी सग़ीर ने कहाकि मुसलमानों के निजी क़ानून में दख़ल देने का किसी को कोई अधिकार नहीं है और भारत के मुसलमान संविधान प्रदत्त अधिकारों से संरक्षित हैं।

इस प्रदर्शन के बाद भारत सरकार और लॉ कमीशन के नाम एक पत्र पर संयुक्त हस्ताक्षर कर रवाना किया गया। सभा में क़रीब दस हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया। यहाँ जमा प्रदर्शनकारियों ने कहाकि आवश्यक हुआ तो इस प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील किया जाएगा।

 

कारी सगीर रजवी

(कार्यालय सचिव)